Wednesday, November 4, 2009

अनसुलझे रिश्ते

अनजाने रिश्ते का एहसास,
बयां करना मुश्किल था ।

दिल की बात को ,
लबों से कहना मुश्किल था ।।


वक्त के साथ चलते रहे हम ,
बदलते हालात के साथ बदलना मुश्किल था ।

खामोशियां फिसलती रही देर तक,
यूँ ही चुपचाप रहना मुश्किल था ।।


सब्र तो होता है कुछ पल का ,
जीवन भर इंतजार करना मुश्किल था ।

वो दूर रहती तो सहते हम ,
पास होते हुए दूर जाना मुश्किल था ।।

अनजाने रिश्ते का एहसास ,
बयां करना मुश्किल था ।।


7 comments:

  1. क्या बात अहि शिवशंकर जी. मज़ा आ गया....जवानी के दिन सर्दी की गुद्गुदाहट याद आ गयी...शुक्रिया....

    मेरे ब्लॉग पर देखेये ज़रूर पधारियेगा...
    avtarmeherbaba.blogspot.com
    lifemazedar.blogspot.com

    सस्नेह

    आपका ही
    चन्दर मेहेर

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  2. चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
    --
    महिलाओं के प्रति हो रही घरेलू हिंसा के खिलाफ [उल्टा तीर] आइये, इस कुरुती का समाधान निकालें!

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  3. बहुत ही अच्‍छा एवं सराहनीय प्रयास,
    हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और शुभकामनायें
    कृपया अन्य ब्लॉगों पर भी जाकर अपने अमूल्य
    विचार व्यक्त करें

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  4. यह एहसास जीवन में कभी न कभी हर किसी को होता है .

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  5. सच कहा है
    बहुत ... बहुत .. बहुत अच्छा लिखा है
    हिन्दी चिठ्ठा विश्व में स्वागत है
    टेम्पलेट अच्छा चुना है. थोडा टूल्स लगाकर सजा ले .
    कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें .
    कृपया मेरे भी ब्लागस देखे और टिप्पणी दे
    http://manoj-soni.blogspot.com/

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